इंदौर। भगवान राम एवं खेड़ापति हनुमान मंदिर की करीब २५० करोड़ की जिस बहुमूल्य जमीन को बेच दिया गया था, प्रशासन ने फिर उसे कब्जे में ले लिया है। पहले कोर्ट के आदेश पर जमीन पुजारी के नाम हुई, फिर पुजारी ने इसे बेच दिया। अब प्रशासन ने नामांतरण को निरस्त कर जमीन पर कब्जा लेने की कार्रवाई शुरू कर दी है। जिनके नाम पर जमीन हुई थी वे मुस्लिम समुदाय से है।
ऐसे हुआ खेल?
जमीन पर ओमकार दास का नाम पुजारी के रूप में था गुरु शिष्य परंपरा के अनुसार बाबू दास बैरागी के नाम पर दर्ज हो गया। 1995 में बैरागी के नाम पर जमीन की डिक्री हो गई। देरी से अपील से सरकार हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से भी हार गई।
2008-09 में तहसीलदार ने कोर्ट के आदेश का हवाला देकर पुजारी के नाम कर दी।
इसके बाद पुजारी ने इसे वर्ग विशेष के निजी लोगों को बेच दिया।
किनके नाम दर्ज कर दी गई थी जमीन?
इम्तियाज, अब्दुल रज्जाक, सैयद मोइनुद्दीन अहमद, मोहम्मद सलीम रज्जाक, मोहम्मद फारुख, अहमद फुकरान, रिजवान फारूक, रजिया फारूक, मोहम्मद नइम, आबेदा फारूक, मोहम्मद अशफाक, मोहम्मद सलीम, असलम रज्जाक, अंजुम पति सलीम, अब्दुल रज्जाक, मोहम्मद मुनाफ, नूर मोहम्मद, अब्दुल मजीद, इकबाल शकूर, बाबूदास पिता गंगादास, मोहम्मद माज के नाम थी।
प्रशासन ने लिया कब्जा।
कलेक्टर ने नामांतरण और बटांकन निरस्त कर दिया है। आज प्रशासन पिपल्या कुमार की 206 खसरे की 2.94 एकड़ जमीन पर कब्जा ले लिया है।
Author: Hindustan News 9
Author Vijay Patel









