इंदौर के विजय नगर थाने के एएसआई भूपेंद्र सिंह गुर्जर सहित चार पुलिसकर्मियों ने खाकी को दागदार करते हुए वसूली की ऐसी पटकथा लिखी, जिसे सुनकर हर वह व्यक्ति दंग रह जाएगा,जो किसी मुसीबत में होने पर पुलिस पर भरोसा करता है, लेकिन कुछ ऐसे भी पुलिसकर्मी होते हैं जो वर्दी पहनते समय जन सुरक्षा की शपथ लेते हैं, लेकिन चंद पैसों की लालच में अपने ईमान से बेईमानी कर डालते हैं। नवंबर 2024 में हुई इस सनसनीखेज वारदात में एएसआई भूपेंद्र सिंह गुर्जर ने अपने तीन साथियों हेड कॉन्स्टेबल मुकेश जादौन, कॉन्स्टेबल कपिल और राधेश्याम के साथ मिलकर वर्दी को उगाही का हथियार बना लिया। ये पुलिसकर्मी आगर मालवा के बड़ौद से ड्रग तस्कर वसीम को उठाकर लाए, लेकिन उसे थाने ले जाने के बजाय शहर के एक नामी 5-स्टार होटल में दो दिन तक बंधक बनाकर रखा। इस दौरान तस्कर के साथ मारपीट की गई और उसे छोड़ने के बदले 5 लाख रुपये वसूल लिए गए। टीआई को गुमराह करने के लिए इन पुलिसकर्मियों ने रिपोर्ट दी कि आरोपी हाथ नहीं आया और उसका मोबाइल बंद था।

हैरानी की बात यह है कि पुलिसकर्मियों का लालच यहीं नहीं रुका। उन्होंने वसीम का ही इस्तेमाल कर एक अन्य तस्कर आरिफ को जाल बिछाकर बुलाया। जब आरिफ अपनी पत्नी और बच्ची के साथ इंदौर पहुंचा, तो सादी वर्दी में तैनात इन पुलिसकर्मियों ने उसे भी उठा लिया और उसी होटल में ले जाकर मोटी रकम ऐंठी। मामले की परतें तब खुलीं जब तत्कालीन एसीपी आदित्य पटले ने जांच शुरू की। कॉल डिटेल और टावर लोकेशन से साफ हो गया कि पुलिसकर्मी और तस्कर दोनों उसी 5-स्टार होटल में मौजूद थे। जांच में यह भी सामने आया कि इस पूरी ‘डील’ को कराने में क्राइम ब्रांच के एक आरक्षक ने बिचौलिए की भूमिका निभाई थी।
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से प्रमाणित हुआ है कि पुलिसकर्मियों ने वैधानिक कार्रवाई के बजाय अवैध लाभ के लिए अपराधियों को बंधक बनाया और फिर पैसे लेकर छोड़ दिया। रिपोर्ट में थाना प्रभारी के नियंत्रण पर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, सबूतों और गवाहों के पहाड़ के बावजूद यह मामला अब तक फाइलों में ही दबा हुआ था। साल 2024 की इस घटना पर अक्टूबर 2025 में रिपोर्ट सौंप दी गई थी, लेकिन मई 2026 तक किसी भी दोषी पुलिसकर्मी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। अब वर्तमान DCP ने इस मामले में फिर से जानकारी मांगी है, जिससे एक बार फिर न्याय की उम्मीद जागी है।

लसुड़िया थाने में भी एएसआई भूपेन्द्र सिंह गुर्जर रहा है मुख्य वसूलीबाज:- एएसआई भूपेंद्र सिंह गुर्जर विजय नगर थाने के पहले लसुड़िया थाने में पदस्थ था, जहां पूरे क्षेत्र में वसूलीबाजी का काम इस एएसआई के द्वारा ही किया जाता था और लेनदेन करके झूठे मुक़दमे बनाने में इस एएसआई को महारत हासिल है। ये वह पुलिसकर्मी है जो जनता की रक्षा करने की शपथ लेते हैं,लेकिन भ्रष्ट आचरण के चलते भक्षक बन जाते हैं। लसुड़िया थाने में भी इस एएसआई के द्वारा पैसे ले देकर झूठे मुक़दमे बनाए गए हैं। ऐसे ही महालक्ष्मी नगर के एक मामले में इस एएसआई द्वारा आरोपी से सांठगांठ करते हुए पैसे लेकर फरियादी पर ही झूठा मामला दर्ज करते हुए आरोपी बना दिया गया था, इस मामले में भी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से शिकायत की गई है। ऐसी भ्रष्ट और आपराधिक मानसिकता वाला पुलिसकर्मी जो रक्षक की आड़ में भक्षक बना बैठा है, उस पर कड़ी कार्यवाही करने की आवश्यकता है, जिससे आम जनमानस के मन में पुलिस की जनहित में काम करने वाली छवि बरकरार रह सके।
कुछ दिन पूर्व ही एएसआई भूपेंद्र सिंह गुर्जर का तबादला विजय नगर थाने से एमआईजी थाने में हुआ है।
Author: Hindustan News 9
Author Vijay Patel









