इंदौर। विगत दिवस तिलक नगर थाना में गाय-बछड़ों की तस्करी में तीन आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए वाहन जब्त किया गया,जबकि 6 अप्रैल को इसी वाहन (MP09 AP6023) द्वारा बिना किसी कागज़ात के गौवंश परिवहन करते हुए पाए जाने पर हिंदूवादी कार्यकर्ताओं द्वारा आज़ाद नगर थाने ले जाया गया था,परंतु उक्त वाहन को कोई भी कार्यवाही न करते हुए छोड़ दिया गया।
जिस वाहन पर तिलक नगर थाने में गौवंश तस्करी के आरोप में कार्यवाही हुई,उसी वाहन को दूसरे थाने में कुछ दिन पूर्व गौवंश परिवहन करते पाए जाने पर बिना कोई कार्यवाही किए ही छोड़ दिया गया,आखिर क्यों?

जब एक गाड़ी आजाद नगर थाना क्षेत्र में गौवंश परिवहन करते पकड़ी गई और बिना किसी कार्यवाही किए ही छोड़ दी गई,परंतु अब जब वही गाड़ी गौवंश परिवहन करते हुए पकड़ी गई तो तिलक नगर थाना प्रभारी द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए वाहन जब्त कर, आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

गौरतलब है कि तिलक नगर थाना पुलिस ने पशु क्रूरता के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने एसेंशिया होटल के पास से पवन यादव निवासी बड़ी ग्वालटोली, राजा धीमान निवासी बड़ी ग्वालटोली और चेतन चौहान निवासी कनाड़िया को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि तीनों आरोपी पिकअप वाहन (एमपी 09 एपी 6023) में बछड़े और गायों को क्रूरतापूर्वक भरकर ले जा रहे थे। वाहन में पशुओं के लिए किसी भी प्रकार की चारा-पानी या उचित व्यवस्था नहीं की गई थी, जिससे उनकी हालत खराब हो रही थी। तिलक नगर पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर पशु क्रूरता अधिनियम सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है,लेकिन यहां गौर करने वाली बात यह है कि जिस गाड़ी पर तिलक नगर थाना प्रभारी द्वारा त्वरित कार्यवाही की गई है, उसी वाहन पर विगत 6 अप्रैल को आजाद नगर थाना क्षेत्र में हिंदूवादी कार्यकर्ताओं द्वारा उक्त पिक-अप वाहन (एमपी09 एपी 6023)को बिना किसी कागजात के गौवंश परिवहन करते पाए जाने पर आजाद नगर पुलिस थाने ले जाया गया था, जिसमें 3 गौवंशों को ठूंसकर ले जाया जा रहा था,इस घटना के समस्त साक्ष्य उपलब्ध हैं और जब गौवंश सहित वाहन को हिंदूवादी आज़ाद नगर थाने ले गए तो उक्त गाड़ी को बिना किसी कार्यवाही किए ही छोड़ दिया गया,जो कि कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाती है कि किस कारण से अथवा किस दबाव से उक्त गाड़ी को बिना किसी कार्यवाही किए छोड़ दिया गया। अगर उसी समय यथोचित कार्यवाही सुनिश्चित की गई होती तो शायद आज यह स्थिति दोबारा निर्मित न होती और गौतस्करों के हौसले बुलंद नहीं होते।
अब सवाल उठता है कि एक ही प्रकार के अपराध के लिए शहर में दो अलग-अलग कानून किसलिए!
मध्य प्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम 2004 (संशोधित 2010/2024) के अनुसार, राज्य में गाय, बैल या बछड़े के अवैध परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध है, जिसके उल्लंघन पर 3 से 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। वैध परिवहन के लिए सक्षम अधिकारी से अनुमति/परमिट लेना अनिवार्य है।
गौवंश परिवहन के मुख्य नियम (म.प्र.):- अनुमति/परमिटः राज्य के भीतर या बाहर गोवंश ले जाने के लिए उचित सक्षम प्राधिकारी से लिखित अनुमति अनिवार्य है।
दस्तावेजः चालक के पास पशु चिकित्सा अधिकारी का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र और परमिट होना चाहिए।
वाहन के नियमः पशुओं को क्रूरतापूर्वक नहीं भरा जाना चाहिए। पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत परिवहन के दौरान पर्याप्त जगह, चारा-पानी की व्यवस्था होनी चाहिए।
दंड: नियमों का उल्लंघन करने पर वाहन जब्त।

“म.प्र.गोवंश वध प्रतिषेध अधिनियम 2004 के तहत् जहां गौवंश (गाय, बछड़े, बैल) के परिवहन के लिए कड़े नियम हैं, इसके तहत, एसडीएम (SDM) या नायाब तहसीलदार से लिखित अनुमति अनिवार्य है।पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होती है,और अवैध परिवहन पर वाहन राजसात (जब्त) करने की कार्यवाही की जाती है.”
Author: Hindustan News 9
Author Vijay Patel








